Dabangg 4

रात करीब 11 बजे मालेगांव के Additional superintendent of police, IPS Officer हर्ष ए पोद्दार के पास मदद के लिए फोन आया।

अली अकबर अस्पताल के पास आजाद नगर में एक भीड़ जमा हो गई थी, जो पांच लोगों के एक परिवार – दो पुरुषों, दो महिलाओं और एक दो साल के बच्चे को मारने के लिए तैयार कर रगे थे। क्योकी उन्हें शक था कि वो परिवार ‘child lifters’ का group है।

मालेगांव से 40 मिनट की दूरी पर स्थित धुले में भीड़ ने बच्चा चोरी की अफवाह पर पांच लोगों की पीट-पीट कर हत्या किए जाने के महज 12 घंटे बाद यह घटना हुई थी। रात पांच लोगों की जान बचाने वाले पूरे police force के समय पर कार्रवाई और intervention की कहानी है।

मालेगांव में पिछले आठ से नौ दिनों से kidnappings की अफवाहें रही थी।   

उस रात central महाराष्ट्र के परभणी जिले के रहने वाले सभी दिहाड़ी मजदूरों का एक परिवार अपने जिले लौट रहा था।  पैसे खत्म होने के बाद उन्होंने मालेगांव में रुकने का फैसला किया और भीख मांग रहे थे।

और इस बीच परिवार की एक 14 साल के लड़के से थोडी बहुत बातचीत हो गई। हालांकि इस बातचीत के बारे में अभी तक कुछ पता नहीं है और ये investigation का हिस्सा है।  लेकिन उस बातचीत के basis पर, इलाके के कुछ बदमाशों ने निष्कर्ष निकाला कि ये kidnappers थे। 

मालेगांव में दो हिस्से होते हैं।  जबकि western side मुख्य रूप से हिंदू है, और eastern side मुस्लिम है।  दिहाड़ी मजदूरों का यह परिवार हिंदू था और वे मुस्लिम इलाके में ठहरे थे।  जबकि इस घटना का कोई valid reason दिखाई नहीं दे रहा था, पर उन लोगो को पहले से ही उनके पहनावे में अंतर की वजह से बाहरी मान लिया गया। और बदमाशों ने बिना कुछ सोचे समझे ही उन लोगों को पीटना शुरू कर दिया।

और जब उन्होने मदद के लिए फोन किया तो IPS Harsh ने तुरंत local police को वहां पर जाने के लिए कहा।  करीब दस मिनट के इस दौरान भीड़ करीब 1500 लोगों तक पहुंच गई।

लेकिन केवल चार सदस्यों के साथ पहुंची टीम ने पोद्दार से और force के लिए request की।  बिना समय बर्बाद किए, Additional SP ने local डीएसपी के साथ एक riot control पलटन भेजी।  जब सुरक्षाबलों ने भीड़ को शांत करने का प्रयास किया तो उन्होंने परिवार को जान से मारने के लिए कहा। Officers ने तुरंत परिवार को दो घरों में उनकी सुरक्षा के लिए पहुँचा दिया। लेकिन भीड़ उनसे परिवार को रिहा करने के लिए कहती रही, ताकि ‘भीड़ न्याय’ यानी ‘Mob Justice’ दिया जा सके।

IPS Officer ने इमाम जैसे local religious leaders से भी भीड़ को शांत करने का request किया।  फिर भी, कोई राहत नहीं मिली। भीड़ ने सुनने से इन्कार कर दिया और नेताओं और पुलिस पर पथराव किया।

1,500 की भीड़ के खिलाफ यह 50 की police force थी, जो उन्हें उन घरों में घुसने से रोकने की कोशिश कर रही थी, जिनमें परिवार को रखा गया था।  और ज्यादा police force की मांग जारी रही।

 और इसलिए IPS officer ने खुद state reserve police force (SRPF) के चार sections और एक और Riot control platoon के साथ उस area में गए।  पुलिस ने भीड़ पर control force, use करना शुरू कर दिया और उन पर लाठीचार्ज कर दिया।  इससे उन्हें भीड़ को पड़ोसी गलियों में धकेलने में मदद मिली।

 दो बोलेरो लाई गई और परिवार को बचा लिया गया, और town के सबसे दूर के पुलिस स्टेशनों में भेज दिया गया। IPS Officer के पहुंचने से पहले ही भीड़ ने पुलिस की एक गाड़ी को भी पलट दिया था। लेकिन किसी भी पुलिस अधिकारी को चोट नहीं आई, और situation को उस point तक नहीं पहुंचने दिया जहां पुलिस को भीड़ पर गोली चलानी पड़े। 

 इसलिए भीड़ में किसी को चोट नहीं आई।  परिवार के पुरुषों में से एक को चोट लग गई, लेकिन बाकी सदस्य, सौभाग्य से, बिना किसी serious चोट के बच गए।  पूरा ऑपरेशन तीन घंटे का था।  लगभग 2:30 बजे ही, police उस area से बाहर निकल पाए।

IPS Officer का कहना हैं, “इन सभी मामलों में, लोग सोचने-समझने की कोशिश भी नहीं कर रहे हैं।  उन लोगो ने आरोप लगाया कि परिवार ने 14 साल के लड़के को अगवा करने की कोशिश की।  लेकिन किसी ने भी एक बार भी basic facts check करने की कोशिश नही की, और ना ही वो इस बात से शांत हुए कि पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया है और पुलिस इस मामले की जांच करेगी। 

IPS Harsh का मानना है कि इनमें से कई अफवाहें बदमाशों द्वारा खुद ही उकसाई जाती हैं जो सिर्फ हिंसा के पागलपन में लिप्त होना चाहते हैं।

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