दीपक जयराम रहाटे दादर के भीड़भाड़ वाले थोक बाजार के एक कोने में सब्जी बेचता है। एक normal सब्जी वाले की तरह वो customers से बातचीत भी करता है और सब्जियाँ बेचकर अपना घर चला रहा है। उसके पास से गुजरें, या उससे सब्जी से तो कोई सब कुछ normal ही लगेगा। किसी को भनक नही पडेगी कि सब्जी वाला दीपक का एक past है, एक mod violence, police encounters और ना जाने कुतनी जानों के खून से भरा है।
एक ऐसा bloody past, जिससे बचकर निकलने में वो सफल रहा।
दीपक गैंगस्टर अमर नाइक का शार्प शूटर था। वो अमर नाइक के लिए वही था, जो माया डोलस या बुवा दिलीप, जो की 1980s के मुंबई के गैंगस्टर है, ये दाऊद इब्राहिम के लिए थे।
एक बढते हुए अंडरवर्ल्ड के साथ बॉम्बे की गरीबी में दीपक ना जाने कब कब में माफिया की ओर चला गया था। उस वक्त gangs ऐसे young लडको की तलाश में रहती थी और मौका देख मदद और पैसे के बहाने उन्हें gang में शामिल कर लिया जाता था।
आज भी deepak जब headquarters के दिनो को याद करता है तो काँप उठता है।
Headquarters वो जगह थी, जहाँ से खूंखार mobster अमर नाइक ने एक बार अपना crime syndicate चलाया था। Deepak का अभी भी वहां एक घर है, जिसे उसने किराए पर दे रखा है।
Deepak, नाइक के Gang के लिए एक शार्प-शूटर था, जिसे murders, जबरन वसूली और Firearms के use के लिए terrorist and disruptive activities Prevention act के तहत तीन बार बुक किया गया था। उसे एक बार rival gangster दाऊद के gang के shooter माया डोलस द्वारा गोली मार दी गई थी, लेकिन गोला लगने को बाद डरने की बजाय दीपक और ज्यादा aggresive और बदले की आग में भडकने लगा था।
उन दिनों चार-पांच gangs दादर में फिरौती वसूली पर control के लिए लड़ाई लड़ रहे थे। और उसकी गली में होने वाली लडाई को देखकर बडे हुए दीपक ने भी वही mafia का रास्ता चुना जो सब करते आ रहे थे।
दीपक के पिता मुंबई सेंट्रल में घड़ी-पट्टा यानी Watch की strap बनाने वाली एक कंपनी में काम करते थे। जब कंपनी बंद हुई, तब deepak सिर्फ 14 साल का था। तो उसने दूध और अखबार बेचना शुरू किया।
लेकिन उसके लिए बंबई में जाना आसान नहीं था।
एक बार पड़ोस की गली में एक आदमी ने उसके भाई को पीटा। तो दीपक ने अपना आपा खो दिया, और उसने दुश्मन के इलाके में जाकर, उस आदमी पर बांस की छड़ी और लोहे की rode से खुब पीटा। और उसे बुरी तरह से घायल कर दिया था।
दीपक के परिवार को पता था, कि वो कितनी मुसीबत में पडने वाले थे। तो उसकी दादी उसे अपने घर दादर ले गईं और एक social worker के माध्यम से उसके लिए सब्जी बेचने के लिए जगह की arrangement करवा दी । लेकिन social worker ने deepak को दादर के एक strongman पोत्या भाई से मिलवाया, जो आगर बाजार के एक डॉन मान्या सुर्वे के साथ काम करता था।
पोत्या की मृत्यु के बाद, दीपक एक knife-fights में शामिल हो गया, जिसके कारण उसे आर्थर रोड जेल में डाल दिया गया।
अमर नाइक, जो अभी-अभी सत्ता में आए थे, ने उन्हें जमानत दे दी। जिसके लिए Deepak, Amar naik का कर्जदार था।
इसके बाद के महीनों में, उसने दाऊद इब्राहिम gang पर घातक हमलों की line लगा दी, जिससे उसे डॉन से धमकियाँ मिलीं और वो पुलिस के निशाने पर आ गया था। Deepak हर वक्त भागता रहता था, और पकड़े जाने या हमला करने का डर हमेशा उसके अंदर रहता था। और अपने बचाव के लिए उसने और crimes करने शुरू कर दिए।
और इस बीच deepak ने अपनी इकलौती बेटी को खो दिया था।
जब दीपक को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया, तो उसने अगले साढ़े पांच साल जेलों में बिताए, और 1996 में उसे जमानत दी गई थी।
जेल का समय, किरण बेदी का एक Lecture और एक top पुलिस वाले की मदद से deepak को अपने जीवन को पटरी पर लाने में मदद मिली।
Deepak को किरण बेदी के एक lecture में भाग लेने का मौका मिला, जिन्होंने जेल के कैदियों के लिए एक reformation programme शुरू किया था। lecture सुनने के बाद वो वापस मुंबई आया और DCP Dutta से contact किया। उन्होंने उसे Tata Institute of social science के एक NGO में भेजा। उसने Rehab programme में दो साल बिताए, जिससे ना केवल उसे सुधार करने में मदद मिली, बल्कि फिर से एक नई शुरूआत करने का विश्वास भी मिला।
लेकिन सुधार की राह आसान नहीं थी। दीपक के rival और नाइक के आदमी उसे परेशान करते रहते थे।
Deepak को 1998 तक सभी मामलों में बरी कर दिया गया था। और फिर वो वापस सब्जी बेचने चला गया।
एक sharp shooter जिसने Mafia ये निकल कर एक साधारण जिंदगी जीने का फैसला किया, ऐसी कोई reformed mafia की कहानी हमें KGF chapter 3 की कहानी के एक हिस्से के रूप में देखने को मिल सकती है।