Balwaan 2

जनवरी 2016 में Manipur की राजधानी Imphal (इंफाल) में कुछ selected journalists के साथ एक secret meeting में हीरोजीत ने दो खुलासे किए। 

 सबसे पहले, उसने accept किया कि वो 2009 में  बाजार के बीच में एक young लडका, जिसके पास कोई weapon नही था, उसकी हत्या का दोषी था, जो की Herojit की Last और सबसे infamous हत्या थी। 

उसका दुसरा Confession एक off the record comment था, जिसे journalists प्रिंट नहीं कर सकते थे, लेकिन ये और ज्यादा चौंकाने वाला confession था, कि उसके हाथो होने वाली killings का Total number 100 से भी ज्यादा था।

 

2003 से 2009 तक हेरोजीत मणिपुर पुलिस में एक head constable था और उसका कहना है कि उसने राज्य में Fake encounter killings देखीं है और उनमें से कई को खुद अंजाम भी दिया है। और उसने उन सब हत्याओं का written record भी रखा है।

 

एक police officer, जिसने किए 100 से भी ज्यादा murders, और फिर खुद ही किया confess, आइए जानते है इस cop killer की cop से killer बनने की journey!

 

हीरोजीत शर्मीला, और दिखने में दुबला- पतला था। और सालो के stress, नशे की लत और हर वक्त मंडराते हुए खतरे कि वजह से वो बर्बाद हो गया था।

लेकिन बहुत कम लोगों ने face to face 100 से ज्यादा लोगो को जिंदा मारा है। और इससे भी कम लोगों ने ऐसी बात को confess किया है। जब हीरोजीत journalists से मिला। उसने किसी से भी नजर नही मिलाई। वो लोग Sofe पर बैठे लोकिन Herojit फर्श पर बैठा और सर झुका के उसने धीरे धीरे अपनी कहानी बतानी शुरू की। जहाँ से इस सबकी शुरूईत हुई थी।

 

हेरोजीत का जन्म 1981 में इंफाल के एक किसान परिवार में हुआ था।  उनके पिता के पास धान के खेत थे, जिनके पास बाँस के पेड़ों और जड़ी-बूटियों और गोभी के किचन गार्डन के लिए जमीन बची थी। इसके साथ साथ उनके पिता Public health department में clerk की नौकरी करते थे।

 

1960s में पहाड़ी जनजातियों के बीच indian state के खिलाफ विद्रोह शुरू हुआ था। Crimes और ज्यादा बढता गया। Kidnappings और जबरन वसूली से कमाई करना आसान हो गया।  जंगलों के borders के पर हथियारों और drugs की smuggling होने लगी।

 

1990s में, जब हेरोजीत ने हाई स्कूल में enter किया, तब उसके धर्म के लोगो ने भी indian state के खिलाफ हथियार उठाना शुरू कर दिया था। Herojit के गाँव  में government salary वाला एक ही व्यक्ति था, उसके पिता, जिसके दरवाजे पर भी खचरे ने दस्तक दे दी थी।

  मणिपुर में शाम जल्दी आ जाती है, और Gunmen हमेशा सोते समय, 20 या 30 के group में आते थे। पूरा परिवार एक साथ इकट्ठा हो जाता था, फिर भी वो लोग उनके घर में तोड़फोड़ करते हैं।

 हालाकी घर में चुराने को भी कुछ नही होता था, लेकिन हीपोजीत ने कहना था कि हर बार वो उसके मन की शांति को चुरा ले जाते थे।

 

फिर उन लोगो ने 20,000 रूपए की मांग की। हेरोजीत के पिता ने उनकी मांगों को पूरा करने के लिए अपनी जमीन बेचना शुरू कर दिया। 

हीरोजीत ने कहा, “ये बहुत ज्यादा torture हो गया  था। जब भी कोई मांग होती थी, हम बिना भोजन के सो जाते थे।  लेकिन किसी को भी बोलने, उनका सामना करने, या भीख मांगने की भी permission नहीं थी।”

 एक दिन, 17 साल के Herojit के सिए बात सहन से बाहर हो गई थी।

जब वो लोग घर में वसूली करने के लिए घुसे तो herojit ने चिल्ला कर कहा कि “हम छह भाई-बहन हैं।  हमारे पास खिलाने के लिए पूरा परिवार हैं।  हम आपकी मदद करना चाहते हैं, लेकिन कम से कम ये तो देखें कि हमारी कमाई क्या है!  ये कहाँ का justice है?”

एक 17 साल के बच्चे को ऊंची आवाज में बात करते सुन वो Gunmen पिछे मुड़े तो हीरोजीत ने उनकी आंखो में आंखे डाल कर कहा: “इसके अलावा, बस ये जान लो कि मैं एक rival group में शामिल हो सकता हूं। मैं ये सच में कर सकता हूं, और फिर जो तुमने हमारे साथ किया यही same में तुम्हारे साथ भी करूंगा!”

 

 हीरोजीत की बहादुरी देखकर वो लोग impress हुए और बोले, “तुम एक बहादुर लड़के हो। तुम हमारे साथ क्यों नहीं जुड़ जाते?  फिर हम तुम्हारे परिवार से एक पैसा भी नहीं लेंगे।”

 

17 साल के बच्चे के लिए ये offer काफी अच्छा था और इससे पहले कि उसके माता-पिता उसे रोके, हीरोजीत उनके साथ सामने के गेट तक चला गया।

परिवार के सब लोग पिछे पिछे दौड़े और उसे छोड़ देने की भीख माँगने लगे।  

तो वो gunmen रूके और कहा,”छोड तो देंगे, लेकिन  पहले इसे सबक सिखाने की जरूरत है।”

 

और उन्होंने हीरोजीत को पेट के बल जमीन पर लिटा दिया।  उनमें से एक बाँस की छड़ी ले आया, फिर  हेरोजीत को याद नहीं है कि उन्होंने उसे कितनी देर पीटा। लेकिन उसे ये याद था कि कैसे बाद में परिवार उसके चारों ओर बैठ गया और सब रोने लगे थे।

और कहानी बताते वक्त पहली हीरोजीत का सर उठा, दोनों हाथो की मुठ्ठी बंद और उसने journalists की तरफ देखकर कहा, ” उस दिन मैं मारने के लिए ready था।”

5 साल बाद 2002 में Herojit, एक commando police को जो भी insurgents मिले, वो जिंदा नही बचे।

 

एक cop killer की कहानी जो, hero होगा या villian ये तय करना भी मुश्किल हो, ऐसे commando police की कहानी को अंजाम balwaan 2 के through देखने को मिल सकता है।

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