Wanted 2

Thumbnail: Police से पूछताछ

राकेश मारिया का स्टिंग ऑपरेशन रिलीज होने के बाद पूरे देश में तहलका मच जाता है अनिरुद्ध बहल के साथ हुई इस ऑफ द रिकॉर्ड बातचीत में जब मारिया से पूछा गया कि फिक्सिंग का पता चलने के बाद भी उन्होंने कोई ऑफिशियल एक्शन क्यों नहीं लिया? तो वो यह कहते नजर आए कि “उन्हें विश्वास ही नहीं हो पा रहा था कि ऐसा कुछ हो भी सकता है और इसीलिए उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया” क्या यही सच्चाई थी? क्या वास्तव में यही वह कारण था जिसके चलते मारिया ने उन तीन खिलाड़ियों के खिलाफ कोई ऑफिशियल एक्शन नहीं लिया था? क्या वाकई एक पुलिस ऑफिसर के ऊपर एक क्रिकेटर हावी हो गया था? या फिर जबरदस्ती करनी पड़ रही इस मुलाकात में पूछे जा रहे हैं जबरदस्ती के सवालों पर वह अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहते थे और इसलिए यह सब बोल रहे थे? आखिर वो असली कारण क्या था जिसके चलते फिक्सिंग की जानकारी मिलने के बाद भी मारिया ने कोई एक्शन नहीं लिया था इसको समझने के लिए हमें 4 साल पीछे 1996 में जाना पड़ेगा, 96 का वर्ल्ड कप हम सबको याद है, खास तौर पर दो घटनाओं के लिए, एक जिसे याद कर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है, जब वेंकटेश प्रसाद ने आमिर सोहेल को क्लीन बोल्ड किया था और दूसरी घटना वो जो आज भी हमें उदास और शर्मिंदा कर देती है। इंडिया और श्रीलंका के बीच हुए इस सेमीफाइनल में दो चीजें ऐसी हुई थी जो आज भी लोगों की समझ से बाहर है, पहला टॉस जीतने के बाद अजहरुद्दीन का फील्डिंग करने का फैसला, और दूसरा स्टेडियम में मौजूद भारतीय दर्शकों का अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण व्यवहार। इस मैच के साथ भारत का वर्ल्ड कप का सफर और मनोज प्रभाकर का कैरियर दोनों ही खत्म हो चुके थे, लेकिन प्रभाकर को लग रहा था कि उनके साथ अन्याय हो रहा है और वह जाते जाते एक बहुत बड़ा धमाका करने वाले थे, आउटलुक मैगजीन के 11 जून 1997 के एडिशन में मनोज प्रभाकर बिना नाम लिए खिलाड़ी के ऊपर मैच फिक्सिंग के आरोप लगाते हैं। Match fixing का ये कलंकित शब्द जिसे राकेश मारिया 3 साल पहले सुन चुके थे, आज उसे पूरा देश सुन रहा था और चारों तरफ एक भूचाल सा आ गया था। प्रभाकर के इन आरोपों से बुरी तरह बौखला चुकी बीसीसीआई आनन-फानन में one मैन इन्वेस्टिगेशन कमीशन की घोषणा कर देती है, कमीशन जिसे head करने का जिम्मा रिटायर्ड चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यशवंत विष्णु चंद्रचूर को सौंपा जाता है। 7 जुलाई से honourable चंद्रचूर अपनी जांच शुरू कर देते हैं और मनोज प्रभाकर, कपिल देव और आउटलुक मैगजीन के कृष्णा प्रसाद समेत कई बड़े लोगों को पूछताछ के लिए बुलाते हैं, इन बड़े लोगों में एक नाम राकेश मारिया का भी था। तहलका के स्टिंग ऑपरेशन से अच्छी तरह फैमिलीयर जस्टिस चंद्रचूर भी ये जानना चाहते थे कि आखिर 1994 में राकेश मारिया ने उन खिलाड़ी और बुकिंग के खिलाफ कोई केस दर्ज क्यों नहीं किया था? और जब उनसे सवाल पूछा जाता है तो काफी देर तक चुप रहने के बाद मारीया अपना उत्तर देना शुरू करते हैं “honourable sir ये वो टाइम था जब अंडरवर्ल्ड रोज मुंबई की सड़कों पर खून की होली खेल रहा था, जाने-माने सेलिब्रिटी और व्यापारियों को रोज धमकियां दी जाती थी, दिनदहाड़े गोली मार दी जाती थी, उस समय हमारा उद्देश्य बिल्कुल साफ था, अंडरवर्ल्ड के ऊपर महत्वपूर्ण जानकारी खट्टा करना, sir, हमारी सबसे पहली और आखरी प्राथमिकता अंडरवर्ल्ड और आतंकियों से अपने नागरिकों की जान बचाना थी, पर अगर मैं उन तीन खिलाड़ियों के ऊपर केस दर्ज करता भी तो किस एक्ट के तहत करता? the prevention of gambling Act, 1887 का एक ऐसा कानून जिसके तहत आज तक किसी को कोई सजा नहीं हुई है. Sir, उस केस को फॉलो करना मेरे टाइम और एनर्जी दोनों की बर्बादी होती। ऐसा करने की जगह मैंने अपना वही टाइम और एनर्जी उस fixer को अपना खबरी बनाने में लगाई और उसकी सहायता से अंडरवर्ल्ड के कई नामी गैंगस्टर का सफाया किया और मुझे अपने इस निर्णय पर जरा सा भी पछतावा नहीं है। तहलका द्वारा किए गए स्टिंग के 13 साल बाद राकेश मारिया महाराष्ट्र एटीएस में एडिशनल डायरेक्टर जनरल के पद पर कार्यरत थे, उनका काम राज्य में आतंकवाद संगठित अपराध, जाली करंसी, गैरकानूनी हथियार और नारकोटिक्स के ऊपर लगाम कसना था। इस बीच मई 2013 के पहले हफ्ते में राकेश मारिया को अपने खबरी से खुफिया जानकारी मिलती है, जिसके मुताबिक एक संदिग्ध नंबर से पाकिस्तान में दिन में कई बार फोन आ रहे थे, इस खुफिया जानकारी के आधार पर राकेश मारिया तुरंत एक टीम बनाते हैं. जिसमें एटीएस के तीन सबसे मेहनती और चतुर अधिकारी शामिल थे. जरूरी वारंट और अनुमति लेने के बाद यह टीम इस नंबर पर नजर रखने लगती है। कुछ दिनों की निगरानी के बाद एटीएस को जो जानकारी हाथ लगी उसका आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन क्रिकेट से जरूर जुड़ा था. करीब 20 साल पहले क्राइम ब्रांच की डीसीपी मारिया ने अपने जीवन में पहली बार मैच फिक्सिंग शब्द सुना था और आज 2013 में एटीएस के एडीजी मारिया अपने जीवन में पहली बार स्पॉट फिक्सिंग शब्द सुन रहे थे. Indian premier league का 2013 एडिशन पूरे जोर-शोर के साथ चल रहा था और ये यह नंबर जिससे बार-बार पाकिस्तान कॉल की जा रही थी अंपायर असद रऊफ का था, पाकिस्तान की जाने वाली इन कॉल मे तो कुछ खास नहीं था लेकिन असद रौफ और बिंदु दारा सिंह के बीच होने वाली बातचीत एटीएस के होश उड़ा देती है, रुस्तम ए हिंद दारा सिंह का इकलौता बेटा इस पाकिस्तानी अंपायर से आईपीएल मैच के ऊपर इंफॉर्मेशन ले रहा था, इंफॉर्मेशन जिसकी मदद से बैटिंग कर खूब पैसा बनाया जा सकता था। इसके अलावा चेन्नई सुपर किंग्स के गुरुनाथ मयप्पन भी अरशद रऊफ और बिंदु दारा सिंह के लगातार संपर्क में थे और मोती सन्स ज्वैलर्स के मालिक संजय जयपुर, पवन जयपुर और छाबड़ा ब्रदर्स जैसे धनी व्यापारी भी बेईमानी और लालच के इस नेटवर्क का हिस्सा थे। इस बार मारिया एटीएस में थे और सट्टा उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था। मारिया के अधिकारी उससे कहते हैं कि अगर इस सट्टेबाजी का आतंकवाद या ड्रग्स से कोई संबंध नहीं है तो वह चाहकर भी इस रैकेट के बारे में कुछ नहीं कर सकते। लेकिन इस बार मारिया चुप नहीं बैठना चाहते थे, इस बारे में आगे क्या करना है, मारिया अभी यह सोच रहे थे कि तभी एक दिन अचानक दिल्ली पुलिस की एक टीम मुंबई आ दमकती है और 16 मई 2013 के दिन पूरे देश को चौक आते हुए राजस्थान रॉयल्स के स्टार खिलाड़ी एस श्रीसंत को गिरफ्तार कर लेती है, श्रीशांत के साथ उसके दो और टीम मेंबर्स अंकित चव्हाण और अजीत चंदीला को भी फ्रॉड, चीटिंग और अपराधिक षड्यंत्र रचने के चार्जेस में अरेस्ट करके दिल्ली ले जाया जाता है। श्रीसंत की गिरफ्तारी से राजस्थान रॉयल्स ही नहीं बल्कि पूरे देश के फैन सकते में आ चुके थे, मीडिया पर सर्कस शुरू हो चुकी थी और इसी सर्कस के बीच अगले दिन दोपहर को मारिया के पास महाराष्ट्र के गृहमंत्री आरआर पाटिल की कॉल आती है। मंत्री जी ने सहयाद्री गेस्ट हाउस में एक मीटिंग बुलाई थी और वह चाहते थे कि एटीएस की तरफ से राकेश मारिया भी इस मीटिंग में जरूर आएं। मारिया तुरंत सहयाद्री गेस्ट हाउस के लिए निकल जाते हैं और जब मीटिंग शुरू होती है, गुस्से से बौखलाए आरआर पाटिल ने क्राइम ब्रांच के जॉइंट कमिश्नर हिमांशु राय पर सवालों की बरसात कर दी कि ऐसा कैसे हो सकता है कि दिल्ली पुलिस हमारे घर में घुसकर इतनी बड़ी गिरफ्तारी करे और हमें इसकी कोई जानकारी ही नहीं है. गृह मंत्री को मनाने की कोशिश में हिमांशु राय बस सफाई देना शुरू करते हैं कि तभी राकेश मारिया का नंबर आता है मिस्टर मारिया, क्या आपको कोई जानकारी नहीं है?? RR पाटिल का क्वेश्चन तंज में था, मतलब वो मारिया से उत्तर की उम्मीद नहीं कर रहे थे, वह जानते थे कि जब क्राइम ब्रांच के पास इस मामले के ऊपर कोई जानकारी नहीं है तो ATS के पास कहां से होगी, लेकिन पाटिल समेत कमरे में मौजूद सभी लोगों को चौक आते हुए, राकेश मारिया कहते हैं, सर, हमने असद रऊफ की कॉल TRAPOED की है और इस spot फिक्सिंग के उपर अच्छी खासी जानकारी है। मारिया के मुंह से यह सुनते ही आर आर पाटिल की बांछें खिल जाती है और वह उसे तुरंत सारी tap हिमांशु रॉय को देने के लिए कहते हैं। अगले दिन राकेश मारिया ATS के एडीशनल कमिश्नर अमितेश कुमार को वो टेप लेकर क्राइम ब्रांच के ऑफिस भेज देते हैं, इसके अलावा मुंबई क्राइम ब्रांच के ज्वाइंट कमिश्नर को एक चिट्ठी लिख आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने को भी कहते हैं। दूध के चले मारिया अब छाछ भी फूंक मार-मार कर पी रहे थे, वह अपनी उस 20 साल पुरानी गलती को एक बार फिर से नहीं दोहराना चाहते थे, ATS से मिले टेप को आधार बनाकर मुंबई crime branch 21 मई के दिन बिंदु दारा सिंह और 3 दिन बाद गुरुनाथ मयप्पन को अरेस्ट कर लेती है। संजय और पवन जयपुर और छाबड़ा बंधु कोर्ट से अंतरिम जमानत ले दुबई भाग जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद भारत वापस आते ही एक बार फिर गिरफ्तार कर लिए जाते हैं। मुंबई और दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई के चलते स्पॉट फिक्सिंग की जांच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुद्गल कमेटी का गठन कर दिया जाता है। इस कमेटी की फाइंडिंग्स के आधार पर राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपरकिंग्स को आईपीएल से 2 साल के लिए बैन कर दिया जाता है और पाकिस्तान वापस भाग चुके असद रौफ को आईसीसी अंपायर्स के अपने एलीट पैनल से बाहर का रास्ता दिखा देती है। इस कमेटी की जांच में यह भी सामने आता है कि कुछ पाकिस्तानी खिलाड़ी भी इंग्लैंड के बुकी मजहर मजीद के साथ लगातार संपर्क में थे और पिछले कई सालों से पैसों के बदले अंतरराष्ट्रीय मैच fix करते आ रहे थे।

तो यह थी मैच फिक्सिंग की पूरी कहानी और ये कहनी हमे wanted 2 mein देखने को मिल सकती है और इसके चांस भी काफी है, क्योंकि जब भी cricket और Bollywood एक साथ आते हैं तो लोगों के बीच में काफी ज्यादा क्रेज देखने को मिलता है, जो इस फिल्म को ब्लॉकबस्टर बनाने में काफी मदद करेगा।

Divanshu

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