50 soldiers की मौत का लिया revenge?
ये कहानी उन 50 soldiers की मौत के बदले की है, जिनको निहत्थे होने का फायदा उठाकर, terrorists ने गोलियो से भुन दिया था।
ये सन् 2004 के आसपास की कहानी है। Soldiers अपनी छुट्टीयां मनाकर, अपने-अपने घरो से वापस duty पर लौट रहे थे।
ये श्रीनगर-जम्मू के बीच जम्मू-कश्मीर के एक छोटे से कस्बे रामबन की बात है। वहां Soldiers को base तक ले जाने के लिए Bus को एक डगमगाता हुआ bridge को पार करना होता है, जिसके नीचे श्कतीशाली Chenab नदी बह रही होती है।
क्योकी bridge पर भरोसा नही किया जा सकता इसलिए, जब बस पार करती थी, तो सारे soldiers बस से उतर जाते थे और बस के पार हो जाने के बाद वो पुल से नीचे उतर जाते थे, ताकि पुल पर भार कम हो सके।
उस खास दिन भी उन्होंने ऐसा ही किया। हर बार की तरह, बस पार हो गई और फिर soldiers, घर की ताजा यादों के साथ, आपस में गपशप करते हुए पुल पर चलने लगे। लेकिन उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनपर पहाड़ियों की चोटी से कोई नजर रख रहा है।
तीन आतंकवादियों ने पहाड़ी की चोटी से धुँआधार गोलियां चलाईं। ऊँची जगह पर होने की वजह से चलते हुए सारे Soldiers clearly उनकी नजरो में थे।
और उनमें से ज्यादातर soldiers वहीं गोलियों से छलनी हो गए। वो सब उनपर counter attack करना चाहते थे, लेकिन उन सबके हथियार बस के अंदर रखे थे। कुछ लोगो का सीना गोलियो से छलनी था तो कुछ लोग गोलियों से बचने के लिए चिनाब नदी में कूद पड़े। लेकिन दुख की बात ये लग सकती है कि कोई भी नहीं बचा। खड्डे में गिरना, चिनाब नदी की तेज धारा और बर्फीला ठंडा पानी उनके लिए जानलेवा साबित हुआ था। एक भी soldier जिंदा नहीं बचा। कुछ deadbodies कभी बरामद भी नहीं हुई। उस दिन, इस हादसे में करीब 50 जवानों ने अपनी जान गंवाई थी।
और terrorists ने बिना हथियारे के, निहत्थे soldiers को मारकर जश्न मनाया होगा।
लेकिन, दूसरी ओर, Indian Army में भूचाल सा आ गया था। अपने जवानो का बेरहमी से हत्या करने वाले terrorists की मौत की सजा का order पहले ही जारी हो चुका था। और उनका मिशन, हत्यारो को 48 घंटों में जिंदा या मुर्दा पकड़ने का था।
उस दिन कई जवानों ने अपने करीबी दोस्तों को खो दिया था। इमोशंस बहुत हाई थे, लेकिन एक आर्मी मैन कभी भी इमोशन्स को खुद पर हावी नहीं होने देता। और Soldiers high alerted घने जंगलों से होते हुए, कड़ी चट्टानों और घाटियों के साथ, उन terrorists को पकड़ने के लिए निकल पड़े।
और ये आसान नहीं था, क्योंकि आतंकवादी आमतौर पर, हमला करने के बाद पाकिस्तान में वापस चले जाते हैं या कभी-कभी घातक हमलों को अंजाम देने के बाद भीड़ के साथ मिल जाते हैं।
Indian Soldiers ने बिना रूके छानबीन की, और 30 घंटे बीत चुके थे। रामबन में आतंकियों का सुराग नहीं था। तो जल्द ही, ऑपरेशन को expand किया गया और आस-पास के areas की भी तलाशी शुरू की गई। और तब उन्हे एक ऐसी ही एक जगह मिली, बनिहाल। Terrorists ने वहां घने जंगलों में एक पहाड़ी ढलान पर डेरा डाल रखा था। लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था, कि चीजें उनके खिलाफ पलटने वाली हैं।
Army की अच्छी Local geography और Intel information की knowledge की वजह से उन्होंने सभी तरफ से terrorists को घेर लिया। जिससे उनके बचके निकलने के सभी रास्ते बंद हो गए। हालांकि, घने जंगल को देखते हुए सेना के लिए exact location का पता लगाना मुश्किल था। लडाई शुरू हुई और 6 घंटे से भी ज्यादा वक्त तक ये encounter चला। दोनो तरफ से गोलियां बरसी, लेकिन last में terrorists का खात्मा हुआ।
Indian Army ने उनकी dead bodies को शहर के बीचों-बीच लटका दिया गया था ताकि उन्हें एक मिसाल बनाया जा सके। और ये border पार करने के इंतजार में बैठे terrorist के लिए सीधी चेतावनी थी कि वो Indian territory में आकर गड़बड़ी ना करें।
ये घटना इसलिए important है, क्योंकि इसमें दिखाया गया है कि soldiers किस तरह अपनी जान जोखिम में डालते हैं। उनमें भी feelings होती हैं, वो सरहद पर खडे होकर हम सबकी रक्षा करते है और अपने साथी के शहीद होने का दुख होने के बावजूद भी अपनी duty को priority देते है।
दुख इस बात का है कि पुल पर मौजूद जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ी। और proud की बात ये की उनके soldier साथीयो ने उनको लगी हर गोली का बदला लिया।


